सन्नाटे का छंद / है, अभी कुछ और जो कहा नहीं गया

है, अभी कुछ और जो कहा नहीं गया। उठी एक किरण, धायी, क्षितिज को नाप गयी, सुख की स्मिति कसक-भरी, निर्धन की नैन-कोरों में काँप गयी, बच्चे ने किलक भरी, माँ की वह नस-नस में व्याप गयी। अधूरी हो, पर सहज थी अनुभूति : मेरी लाज मुझे साज बन ढाँप Read more…