देखना ओ गंगा मइया; Dekhna O Ganga Maiya

चंद पैसेदो-एक दुअन्नी-इकन्नीकानपुर-बंबई की अपनी कमाई में सेडाल गए हैं श्रद्धालु गंगा मइया के नामपुल पर से गुजर चुकी है ट्रेननीचे प्रवहमान उथली-छिछली धार मेंफुर्ती से खोज रहे पैसेमलाहों के नंग-धड़ंग छोकरेदो-दो पैरहाथ दो-दोप्रवाह में खिसकती रेत की ले रहे टोहबहुधा-अवतरित चतुर्भुज नारायण ओहखोज रहे पानी में जाने कौस्तुभ मणि।बीड़ी Read more…

गंगा स्तोत्रम् – Ganga Stortam

देवि सुरेश्वरि भगवति गङ्गे त्रिभुवनतारिणि तरलतरङ्गे ।शङ्करमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले ॥१॥ भागीरथि सुखदायिनि मातस्तव जलमहिमा निगमे ख्यातः ।नाहं जाने तव महिमानं पाहि कृपामयि मामज्ञानम् ॥२॥ हरिपदपाद्यतरङ्गिणि गङ्गे हिमविधुमुक्ताधवलतरङ्गे ।दूरीकुरु मम दुष्कृतिभारं कुरु कृपया भवसागरपारम् ॥३॥ तव जलममलं येन निपीतं परमपदं खलु तेन गृहीतम् ।मातर्गङ्गे त्वयि यो भक्तः किल Read more…