शिकायत

ये शिकायत भी अजी हाँ खूब होती है, क्या अदा है कि हर दिल अजीज होती है। वो किस्सा किस्सा ही क्या,। जिसमेंं, सिर्फ अपनी ही बात हो। मजा तो तब आता जब किसी की शिकायत का साथ हो। उमंग भर जाती दिल में ताजगी आ जाती है, बात गैरों Read more…

मिट्टी की महिमा / शिवमंगल सिंह ‘सुमन’

निर्मम कुम्हार की थापी से कितने रूपों में कुटी-पिटी, हर बार बिखेरी किन्तु मिट्टी फिर भी तो नहीं मिटी। आशा में निश्छल पल जाए, छलना में पड़ कर छल जाए सूरज दमके तो तप जाए, रजनी ठुमकी तो ढल जाए, यों तो बच्चों की गुड़िया-सी, भोली मिट्टी की हस्ती क्या. Read more…

देखना ओ गंगा मइया; Dekhna O Ganga Maiya

चंद पैसेदो-एक दुअन्नी-इकन्नीकानपुर-बंबई की अपनी कमाई में सेडाल गए हैं श्रद्धालु गंगा मइया के नामपुल पर से गुजर चुकी है ट्रेननीचे प्रवहमान उथली-छिछली धार मेंफुर्ती से खोज रहे पैसेमलाहों के नंग-धड़ंग छोकरेदो-दो पैरहाथ दो-दोप्रवाह में खिसकती रेत की ले रहे टोहबहुधा-अवतरित चतुर्भुज नारायण ओहखोज रहे पानी में जाने कौस्तुभ मणि।बीड़ी Read more…

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त Maithili Sharan Gupt

नर हो, न निराश करो मन को कुछ काम करो, कुछ काम करोजग में रह कर कुछ नाम करोयह जन्म हुआ किस अर्थ अहोसमझो जिसमें यह व्यर्थ न होकुछ तो उपयुक्त करो तन कोनर हो, न निराश करो मन को। संभलो कि सुयोग न जाय चलाकब व्यर्थ हुआ सदुपाय भलासमझो Read more…